मुकेश सिंह मोंटी - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

देश के लिए जिसने विलास को ठुकराया था,
त्याग विदेशी धागे उसने खुद ही खादी बनाया था,
पहन के काठ के चप्पल जिसने सत्याग्रह का राग सुनाया था,
देश का था अनमोल वो दीपक जो महात्मा कहलाया था...!!


आज विश्व में लोग यदि भारत को जानते पहचानते हैं तो उसका एक बड़ा कारण बापू हैं, क्योंकि उनके सिद्धांतवादी जीवन ने भारत को एक विशिष्ट पहचान दिलवाई है. महात्मा गाँधी को भारत के राष्ट्रपिता की उपाधि दी गयी है. गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर को जन्में मोहनदास करमचंद गांधी देश के सबसे प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनकारी नेतृत्त्व के तौर पर उभरे, जिन्होंने अपनी सत्य, अहिंसा, क्षमा, सत्याग्रह जैसी नीतियों के जरिये देश की स्वतंत्रता में बड़ा योगदान दिया. प्रारम्भिक शिक्षा गुजरात के ही विद्यालय से प्राप्त करने के उपरांत बापू ने मैट्रिक की शिक्षा बम्बई यूनिवर्सिटी से प्राप्त की थी. इसके बाद गाँधी जी ने लंदन से बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त की.

कानून की बेहतर समझ होने के चलते उन्होंने सत्याग्रह, खिलाफत, अंग्रेजों भारत छोड़ो, स्वदेशी आंदोलन इत्यादि के माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को हिला कर दिया. हिंसा के सख्त खिलाफ महात्मा गांधी का मानना था कि "आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी", वास्तव में उनके विचार एक कल्याणकारी संत के ही विचार थे. तभी तो हम उन्हें आज तक साबरमती का संत कहकर पुकारते हैं.

आज देश को बापू की दी गयी सीख और उनकी विचारधारा पर एक बार फिर चलना होगा. आज का भारत आधुनिक होते होते बेहद बदल गया है.. हिंसा, विदेशी विचारधारा, सामाजिक भेदभाव, उपभोगी संस्कृति आदि का बोलबाला हर ओर देखा जा सकता है. ऐसे में आवश्यकता है कि एक बार फिर गाँधीवादी विचारधारा को अपनाया जाये, उनके आदर्शों को अपने जीवन में स्थान दिया जाये और देश को सार्थक तौर पर प्रगतिकारी बनाने की राह पर कदम आगे बढ़ाया जाये. इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को गांधी जयंती की मंगलकामनाएं.

बापू का समस्त जीवन ही हम सभी के लिए उनका संदेश रहा है, उनके आदर्श, सिद्धांत और प्रेरणादायक विचारों की श्रृंखला सभी भारतवासियों के लिए एक अनमोल उपहार के समान है. आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती के अवसर पर मैं आप सभी को समस्त भारतीय जनता पार्टी परिवार की और से हार्दिक शुभकामनाएं अर्पित करता हूं.


साभार
मुकेश सिंह मोंटी 
पार्षद, मौलवीगंज, लखनऊ

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