गुजरात के वेरावल में स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम और सर्वाधिक प्रमुख ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। यह पावन स्थल सदियों से भारतीय आस्था, संस्कृति और गौरव का प्रतीक रहा है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव द्वारा कराया गया था तथा इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में भी मिलता है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह मंदिर अनेक आक्रमणों और ध्वंस के बावजूद हर बार पुनः भव्य स्वरूप में खड़ा हुआ, जो भारत की अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है।
आज इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल पर पहली बार बाबा सोमनाथ जी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुकेश सिंह मोंटी जी ने भी मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और समुद्र तट के समीप स्थित इसकी भव्यता श्रद्धालुओं को गहरी अनुभूति प्रदान करती है।
दर्शन के दौरान सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला और धार्मिक परंपराओं को नजदीक से देखने का अवसर मिला। यह अनुभव न केवल आध्यात्मिक शांति देने वाला रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की गहराई को भी महसूस कराने वाला रहा। बाबा सोमनाथ जी के दर्शन को जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण माना गया।